मुरारी बापू ने भगवान कृष्ण पर किया अभद्र टिप्पणी? यादव समाज कर रहा विरोध

प्रवचनकार मुरारी बापू के द्वारा भगवान श्री कृष्ण बलराम एवं उनके परिवार के संबंध में आपत्तिजनक बातें कही गई थी जिसके विरोध में देवास के यादव समाज द्वारा पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की है की मुरारी बापू पर कड़ी कार्यवाही हो। उन्होंने कहा कि हमारे धार्मिक मान बिंदुओं को कोई नुकसान पहुंचाएगा आहत करेगा इसका विरोध न केवल एक समाज बल्कि पूरा सनातन धर्म विरोधी होगा यह अभियान केवल एक समाज का नहीं है पूरी सनातन परंपरा का भी अभियान है। भारतवर्ष के सनातन परंपराओं को मानने वाले समस्त हिंदू धर्मावलंबियों से आग्रह किया गया कि वह भी इस तरह के कृत्य का विरोध करें ऐसे वक्ताओं का सामाजिक रूप से बहिष्कार करें सनातन धर्म के संतो कथावाचक ओ धर्माचार्य श्रोताओं एवं समस्त समाज जनों को एक साथ खड़े होकर के विरोध करना चाहिए।
समाज के पदाधिकारीगण वहां उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख श्री शशिकांत यादव (महाकवि) एवं श्री नंदकिशोर यादव (जिला अध्यक्ष अखिल भारतीय ग्वाल महासभा ) राजेश यादव (पूर्व जिला महामंत्री) नरेंद्र यादव (सचिव अखिल भारतीय यादव महासभा) डॉ. जसवंत सिंह यादव (पूर्व जिला अखिल भारतीय यादव महासभा ) श्री राजेश यादव (पूर्व पार्षद ) श्री महेश यादव (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिल भारतीय पाल महासभा) श्री दुर्गेश यादव अध्यक्ष (अखिल भारतीय यादव महासभा ) संतोष यादव (युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय पाल महासभा ) इत्यादि उपस्थित थे।

बता दे तीन हफ्ते पहले से मुरारी बापू का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की आखरी 26 साल की दर्दनाक कहानी बता रहे है। उस वीडियो की एक शार्ट क्लिप को वायरल किया जा रहा है। देखें वीडियो –

क्या है पूरा मामला

तीन हफ्ते पहले से मोरारी (Morari Bapu) बापू से भाजपा के पूर्व विधायक पबुभा माणेक (Pabubha Manek) के उत्तेजक व्यवहार की ख़बर सुर्ख़ियों में है। इस घटना के समय जब मोरारी बापू द्वारका मंदिर परिसर में बैठ मीडिया से बात कर रहे थे, तभी अचानक पबुभा माणेक उन पर बुरी तरह बिगड़ने लगे। उनका यह क्रोध भगवान श्रीकृष्ण के बारे में बापू द्वारा की गई एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर अपने पूरे उबाल पर था। दरअसल बापू ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में रामकथा के दौरान एक सन्दर्भ में यह कह दिया था कि श्रीकृष्ण (Lord Krishna) के भाई बलराम मदिरापान करते थे। इस वाक़ये से मोरारी बापू के समर्थक जहां तनाव में हैं वहीं उस विरोधी ख़ेमे में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है जो उनके सेकुलरिज्म को गाली की तरह देखता आया है।

भूलना नहीं चाहिए कि हम उस देश मे रहते हैं जहां बहुत कुछ बर्दाश्त कर लिया जाता है. मुद्दों पर सेलेक्टिव चुप्पी भी किसी से छुपी नहीं. लेकिन जब धर्म से जुड़ी बात हो तो भावनाओं को आहत होने में पल भर भी नहीं लगता और पूरा देश एक साथ उठ खड़ा होता है. कृष्ण जो जन जन में समाए हैं.

सबके हॄदय में बसे हैं. उनकी छवि को कोई दाग लगे, यह कैसे बर्दाश्त होगा? कुल मिलाकर हमने ये अधिकार किसी को दिया ही नहीं कि वो हमारी सदियों से चली आ रही मान्यता और आस्था से खिलवाड़ कर चुपचाप बरी हो जाए.

धर्मगुरुओं को भी नहीं बख्शा जाता. ऐसे में आध्यात्म गुरु मोरारी बापू का वक्तव्य बर्र के छत्ते में हाथ डाल लेने जैसा है. यद्यपि पूरा वीडियो देख लेने के बाद उनका तात्पर्य कृष्ण की छवि को बिगाड़ने का कतई नहीं लग रहा बल्कि वे तो उनकी पीड़ा की ही बात कह रहे हैं।

बापू ने कृष्ण की पीड़ा व्यक्त करते हुए उक्त बातें कहीं थीं. लेकिन जैसा कि होता आया है कि एक टुकड़े को उठाकर वायरल कर दिया जाता है. यहां भी यही हुआ. मोरारी बापू के शब्द हूबहू ये थे, ‘जो कृष्ण ने गीता में कहा, धर्म संस्थापनार्थाय. मैं धर्म के स्थापन के लिए आता हूं. ये आदमी पूरे संसार में धर्म स्थापना के लिए टूट गया, द्वारका में धर्म स्थापन न कर सका Fail!! Totally Fail हुआ द्वारका में धर्म स्थापन? उसकी जनता, उसके बेटे, उसके बेटे के बेटे धूम शराब पीते थे .

द्वारका के राजमार्ग पर शराब पीते थे. कुछ बातें तो मैं आपको न बताऊं, वो ही अच्छा है लेकिन जो है, है. छेड़छाड़ होती थी. न दिन कोई देखता था, न रात. और उनके परिवार के लोग और पीने के लिए जब कोई पाबंदी आती, डराती तो चोरी करने में भी चूक नहीं करते थे. जो-जो अधर्म के लक्षण थे, सब दिखाई देते थे. ये तो तब जाना गया, शताब्दी के दूसरे दिन रात को.

नारद ने विदाई नहीं ली है, उद्धव ने विदाई नहीं ली है. दोनों कृष्ण की आज्ञा लेकर द्वारका की रात्रिचर्या देखने के लिए निकलते हैं कि द्वारका में क्या हो रहा है. कृष्ण के चेहरे से दोनों रो पड़ते हैं कि आदमी बहुत दुःखी है. गुजराती में कवि काग ने लिखा है. ‘गोविन्द तूने अवतार लेकर सुख पाया कि दुःख पाया?’ तेरे परिवार में तेरी कोई कही बात, जिसका शब्द सुनकर ब्रह्माण्ड हिल जाता था.

दुर्योधन की सभा में संधि का प्रस्ताव लेकर जब योगेश्वर जाते हैं. अस्सी-अस्सी हजार साल की तपस्या छोड़कर विन्ध्य्वासी, हिमालयवासी, मेरु के वासी, महात्मा समाधि छोड़कर भागे जा रहे थे हस्तिनापुर. किसी ने पूछा, ‘योगियों कहां जा रहे हो?’ बोले, ‘आज भगवान कृष्ण बोलने वाले हैं. ये वचन यदि सुनने में रह गए तो हमारा तप बेकार गया.’ उसका एक बोल (यह हिस्सा समझ नहीं आया) उसका बड़ा भाई दाऊ चौबीस घंटों पीता था बलराम!’

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