जानवरों के हिंसा करने वालों के लिए ये होंगे नियम, पिल्ले को इन लड़कियों ने पैरों से कुचला

पिछले कुछ दिनों में जानवरों पर हिंसा के मामले तेजी से सामने आए हैं। भारत के लिए कहा जाता है कि यह प्रकृति को पूजने वाला देश है। ऐसा कहने की एक वजह यह भी रही है कि यहां पर जानवरों को भी पूजा जाता रहा है। मान्यताओं के अनुसार, देश में बाघ, हाथी, कुत्ता, बंदर, सांप, मोर, गाय-बैल आदि की पूजा होती रही है। लेकिन यहां पर जानवरों के साथ क्रूरता का भी इतिहास रहा है। राजा-महाराजा शौक के चलते जंगली जानवरों का शिकार करते थे। हालिया समय में भबी जानवरों से क्रूरता के मामले बढ़े हैं। जैसे-

27 मई को केरल में एक हथिनी ने विस्फोटक से भरा फल खा लिया था। बाद में हथिनी की मौत हो गई थी।


केरल में मारी गई हथिनी कुछ दिनों तक पानी में खड़ी रही थी। बाद में यहीं उसकी मौत हो गई थी

6 जून को हिमाचल प्रदेश में एक गर्भवती गाय को विस्फोटक खिलाने का मामला आया। विस्फोटक से गाय का जबड़ा उड़ गया।

10 जून को तमिलनाडु में विस्फोटक भरा मांस खिलाकर एक सियार को मार डाला गया।

19 जुलाई को राजस्थान के चूरू जिले में कुछ लोगों ने ऊंटनी के पैर काट दिए। बताया जाता है कि ऊंटनी एक खेत में घुस गई थी। इससे नाराज होकर खेत मालिक ने उस पर हमला कर दिया। बाद में ऊंटनी की इलाज के दौरान मौत हो गई।

इसे पकड़ाने वाले को 50000 का इनाम

अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो आया है। यह वीडियो एक बिल्ली को जिंदा जलाने का है। वीडियो में दिख रहा है कि बिल्ली को एक आदमी ने लाइटर से जलाया। ह्यूमन सोसायटी इंटरनेशनल ने यह वीडियो पोस्ट किया है। उसने लोगों से आरोपी को पकड़ने में मदद मांगी है। जानकारी देने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम देने का ऐलान भी किया गया है। यह वीडियो कुछ-कुछ एनिमल क्रश वीडियो जैसा है।

एनिमल क्रश के वीडियो क्या होते है –

एनिमल क्रश वीडियो जानवरों को टॉर्चर करने के वीडियो होते हैं। इनमें छोटे जानवरों को निर्ममता से मारा, जलाया, कुचला या काटा जाता है। यह सब पैसों के लिए किया जाता है। इंटरनेट पर इस तरह के ढेरों वीडियो पड़े हैं। फिलीपींस, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कई देशों में इस तरह के वीडियो का एक बड़ा मार्केट है, जहां पैसे देकर जानवरों को टॉर्चर करने के वीडियो बनाए और बनवाए जाते हैं। हालांकि पुलिस इन पर कार्रवाई भी करती है। लेकिन चोरी-छुपे यह क्रूरता जारी है।

अब बात भारत में जानवरों से जुड़े कानूनों की
जानवरों के अधिकारों के लिए कौनसे कानून हैं?

भारत में जानवरों के प्रति अत्याचार रोकने के लिए दो तरह के कानून हैं। एक, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए एक्ट), 1960. यह किसी भी जानवर पर अत्याचार और यातना को रोकने के लिए बनाया गया है। पीसीए एक्ट में जानवरों को रखने, उनके खाने-पीने, उन्हें लाने-ले जाने, उनसे काम लेने के बारे में साफ लिखा है।

दूसरा, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972. यह जंगली जीवों को सुरक्षा देता है। साथ ही सर्कस, चिड़ियाघर के जानवरों के लिए भी यही कानून लागू होता है। इनके अलावा जानवरों के लिए राज्यवार अलग-अलग कानून होते हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 जानवरों पर अत्याचार करने वालों के लिए सजा का प्रावधान करती है। इनमें दो से पांच साल की सजा और जुर्माने की व्यवस्था है।

रिपोर्ट कैसे कर सकते हैं?

जानवरों पर अत्याचार के मामलों की रिपोर्ट पुलिस में कर सकते हैं। इसके अलावा जानवरों के लिए काम करने वाली संस्थाओं जैसे- पीपल फॉर दी इथिकल ट्रीटमेंट्स ऑफ एनिमल (पेटा), पीपल फॉर एनिमल की मदद भी ले सकते हैं।

जानवरों से क्रूरता करने पर किस तरह की सजाएं हैं?

पीसीए एक्ट के सेक्शन 11 में जानवरों के अत्याचारों से जुड़े सभी अपराधों के बारे में लिखा है. इनमें किसी पशु को मारने, जहर देने, अपंग करने और पशुओं की लड़ाई करने जैसे अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं. इनमें पुलिस आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है. वहीं जानवर को घर से निकालने, भूखा रखने जैसे अपराध में आरोपी को वॉरंट के तहत ही गिरफ्तार किया जाता है। लेकिन पीसीए एक्ट के तहत बहुत कम सजा है।

इस कानून के तहत पहली बार अपराध करने वालों को केवल 50 रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है और गंभीर मामलों में तीन महीने की सजा हो सकती है। हालांकि गंभीर अपराधों में आईपीसी की धारा 428, 429 लगती है। ऐसा होने पर पांच साल तक की जेल हो सकती है।

जंगली जानवरों से बुरे बर्ताव या उनके शिकार के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत दंड का प्रावधान है। इस कानून के तहत, पहली बार अपराध पर 3 से 7 साल की जेल की सज़ा के साथ 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

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