स्कूल फीस के लिए लड़की ने मोबाइल चुराया, डिटेक्टिव मालिक ने खुद जांच की और पकड़ा, फीस भी भर दी

हमारा इंदौर, यहां वहीं लोग रहते है जिन्होंने जरूरत पड़ने पर हजारों लोगों को इस कोरोना काल में खाना दिया, कपड़े दिए। लेकिन कल एक अनूठा मामला सामने आया है। यहां लॉकडाउन में परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। इस वजह से 12वीं क्लास की एक होनहार छात्रा के माता-पिता के पास स्कूल की फीस जमा करने के लिए पैसे नहीं थे। कोई रास्ता नहीं था। उसने अपने ही मालिक का महंगा फोन चुरा लिया। मालिक डिटेक्टिव हैं। खुद ने ही खोजबीन की और केस सुलझा लिया। हालांकि उन्होंने छात्रा के भविष्य को देखते हुए पुलिस केस नहीं किया।

चोरी के दौरान किसी के भी घर में नहीं आने-जाने की पुष्टि ने पसोपेश और बढ़ा दी। घरेलू कामकाज करने वाली नाबालिग बच्ची को दुबे परिवार के सदस्य घर के बच्चों की तरह ही मानते हैं और जानते हैं कि वह प्रतिभशाली है जिसे 11वीं की परीक्षा में 71 प्रतिशत अंक मिले थे। इसलिये उसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं कि वह चोरी कर सकती है।

शुक्रवार को दुबे द्वारकापुरी थाने रिपोर्ट लिखाने पहुंचे जहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि उनकी शिकायत थाना प्रभारी के आने पर लिखी जाएगी।

आखिर उन्होंने पुलिस सिटीजन कॉप सेवा पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। तभी वह नाबालिग काम करने घर आई। न चाहते हुए भी दुबे ने उससे भी मोबाइल के बारे में पूछा जिसपर वह थोड़ी असहज हो गई।

पेशे से डिटेक्टिव दुबे ने बच्ची को समझाइश दी और विश्वास में लेकर आश्वस्त किया कि अगर उससे पैसे की तंगी के चलते गलती हुई है तो वे उसकी शिकायत नहीं बल्कि मदद करेंगे।

अपने किये से असहज व अपराध बोध से परेशान प्रतिभशाली छात्रा ने सच्चाई बयान की और कहा कि उसने सिर्फ स्कूल फीस भरने जितनी राशि के बदले फोन गिरवी रखा था जो पैसे आने पर वह वापस लाकर चुपचाप घर रख देती। इतना बताकर वह रोने लगी। उसकी दास्तां सुनकर दुबे परिवार के सदस्यों की भी आँखे नम हो गई। छात्रा के भविष्य को देखते हुए न सिर्फ उसे माफ कर दिया बल्कि फोन गिरवी रखकर ढाई हजार रुपए देने वाले युवक के पैसे भी लौटा दिये। गौरतलब है दुबे ऑक्टोपस इंटेलिजेंस के डायरेक्टर हैं व राजनीति व समाज सेवा से भी जुड़े हैं।

यह कहानी एशिया के सबसे बड़े नगर इंदौर शहर के सुदामा नगर में रहने वाले डिटेक्टिव धीरज दुबे की। 2 अगस्त को उनका महंगा मोबाइल चोरी हो गया। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले। बाहरी कोई व्यक्ति नजर नहीं आया। उन्हें घर में काम करने वाली बाई की 16 साल बेटी पर शक हुआ। इसके बाद उन्होंने द्वारकापुरी थाने में आवेदन दिया। पुलिस मोबाइल चोरी की घटनाओं पर गंभीरता नहीं बरतती, इस केस में भी ऐसा ही हुआ। पुलिस ने कोई ख़ास जांच नहीं की। आखिर में डिटेक्टिव को खुद ये करना पड़ा।

ढाई हजार रुपए में दुकान पर गिरवी रख दिया था मोबाइल


इसके बाद धीरज ने खुद पड़ताल की तो पता चला कि बाई की लड़की 2 अगस्त से ही गायब थी। उसे बुलाकर बातों में उलझाया गया। पहले तो वह इंकार करती रही। सामाजिक बदनामी और भविष्य बर्बाद होने की बात आते ही वह घबरा गई। और बोली, पापा के पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे। दूसरा कोई विकल्प भी नहीं था, मैंने मोबाइल चुराकर एक दोस्त को दिया था। उसने ढाई हजार रुपए में एक दुकान पर गिरवी रख दिया।

लॉकडाउन के कारण फीस नहीं भर पाए थे माता-पिता

धीरज दुबे ने पुलिस को सूचना देकर मोबाइल शॉप से मोबाइल छुड़वाया। बाद में छात्रा की फीस भी भर दी। दुबे ने बताया कि वह 11वीं में 71 प्रतिशत अंक लाई थी। लॉकडाउन के कारण उसके माता-पिता फीस नहीं भर सके इसलिए उसने चोरी की। उसकी नासमझी के कारण मोबाइल में जितना भी डाटा था, सब खत्म हो गया, क्योंकि मोबाइल चुराने के बाद उसने फ्लाइट मोड पर डाला और सिम तोड़कर फेंक दी थी। धीरज ने उसे पढ़ाई के बाद जॉब दिलवाने का वादा किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

इसे भी पढ़े

google-site-verification=I1CQuvsXajupJY4ytqNfk1mN82UWIIRpwhZUayAayVM