दस हजार लेता है थाने का टी. आई., तीन हजार बीट प्रभारी, पाँच हजार पटवारी, पाँच हजार तहसीलदार, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते है ये सारा रुपया किसान की जेब से जाता है किसान को लूट सके उतना लूट। बोरवेल का गोरख धंधा।

मामला मन्दसौर नीमच जिले का है यहाँ भू-जल स्तर नीचे ओर कम होने के कारण प्रशासन द्वारा डार्क झोन एरिया घोषित है जिसके अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति बिना प्रशासनिक अनुमति के खड़ा होल या बोरवेल (हालेंड मशीन से बोरवेल) नही कर सकता लेकीन दोनों जिलों में आप देखेंगे की हर गाँव हर थाना क्षेत्र में दो से चार बोरवेल की मशीनें अपने अपने ठिकानों पर पड़ी रहती है। और रात होते ही टी. आई. साहब के मिसकॉल से स्विच ऑन हो जाती है और रातभर चलती है। हमारा तो ये मानना है की दोनों जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को डार्क झोन में तमीलनाडू, केरला, महाराष्ट्र, अन्य राज्यो से आई हजारो गाड़ियां जो अगली बारिश तक दोनों जिलों की धरती को रातभर छेदती है। या तो दिखाई नही देती या फिर किसान हितों में किसानों को लूट अपनी कमीशन के लिए आँख के अंधे नाम नैन सुख बनने का प्रयास कर रहे है। एजेंट अधिकारी कर्मचारियों के कारण लुटा जा रहा किसान। बीना डार्क झोन या राजस्थान या देश के कई इलाकों में 80 से 90 रुपया फ़ीट में या कुछ अधिक रुपयों में बोरवेल किया जाता है। पर मन्दसौर नीमच जिले में छुपकर या चोरी से बोरवेल करने के लिए 140 से 160 रुपये फ़ीट बोरवेल किया जाता है। ये जो ऊपर के रुपये लिए जाते है इसमें एजेंट , संबंधित थाने का टी.आई. , क्षेत्र का बीट प्रभारी , पटवारी, तहसीलदार सभी को ऊपर लिखे रुपये देना होते है नही तो ये चोरी से बोरवेल संभव नही। और जब इन सभी के पास इनका लिफाफा पहुंच जाता है तो फिर आप रात भर इनको जगाने, सूचना देने की कोशिश कर लीजिये सुबह आपको कॉल आयेगा यार रात को ज्यादा… यार मेहमान थे… यार अब गया क्या वो? जैसे फिक्स स्लोगन सुनने को मिलेंगे। दोनों जिले के कलेक्टर को है अधिकार मशीनों को फ्री हैण्ड करने का। हमारा दोनों मान्यवरों से सहर्ष विनम्रतापूर्वक निवेदन है की या तो इन मशीनों को पूर्णतया डार्क झोन में भी बोरवेल करने की अनुमति दे देना चाहिए या फिर इन मशीनों को दोनों जिलों से पूर्णतया बाहर कर देना चाहिए। क्योंकि मन्दसौर औेर नीमच जिले में कम बारिश से किसान हुई उपज को भी पानी के लिए किस्मत आजमाइश कर रहा है। और लूटता ही जा रहा है। बोरवेल में पानी आये या नही आये टी.आई. से लेकर तहसीलदार तक लिफाफा तो चाहिए ही चाहिए ।
बिकता अधिकारी लुटता किसान

लेखक – राजपाल सिंह परिहार

देश के 15 से अधिक राज्यो में ख़बर को पढ़ा ज्याता है । ख़बर ओर किसान की विवशता पर कार्यवाही हेतु दोनों जिलों के कलेक्टर सहित माननीय मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों को भी संज्ञान करवाया जा रहा है । अपेक्षताकृत कार्यवाही हो कर डार्क झोन फ्री किया जा सके क्यो की किसान पानी की चाह में मानेगा नही ओर अगर ये नियमों में बंधा रहा तो अधिकारी भी मानेंगे नही ओर इस सभी की मार केवल किसान पर पड़ती जाएगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

इसे भी पढ़े

आपका मुद्दा

उठाइए अपना मुद्दा, ओबेन न्यूज़ बनेगा आपकी आवाज। शिक्षा, सड़क, बिजली, नौकरी, काम से सम्बन्धित किसी भी मुद्दे का वीडियो बना कर 9111124210 पर भेजें।