आज का हिन्दू पंचांग एवं गोर्वधन पूजा का शुभ मुहूर्त


⛅ दिनांक 15 नवम्बर 2020
⛅ दिन – रविवार
⛅ विक्रम संवत – 2077 (गुजरात – 2076)
⛅ शक संवत – 1942
⛅ अयन – दक्षिणायन
⛅ ऋतु – हेमंत
⛅ मास – कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार – अश्विन)
⛅ पक्ष – कृष्ण
⛅ तिथि – अमावस्या सुबह 10:36 तक तत्पश्चात प्रतिपदा
⛅ नक्षत्र – विशाखा शाम 05:16 तक तत्पश्चात अनुराधा
⛅ योग – शोभन रात्रि 11:07 तक तत्पश्चात अतिगण्ड
⛅ राहुकाल – शाम 04:34 से शाम 05:57 तक
⛅ सूर्योदय – 06:50
⛅ सूर्यास्त – 17:55
⛅ दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण – गौक्रीड़ा, गोवर्धन पूजा, अन्नकूत, बलि-पूजा

अन्नकूट दिवस / गोवर्धन-पूजा

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
15:25:42 से 17:39:38 तक
– आर्थिक सम्पन्नता और समृद्धि के लिए उपाय – इसके लिए आज गाय को स्नान करवा दें और फिर उसका तिलक करें। उसके बाद उसे फल और चारा खिलाएं और फिर गाय की सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा के बाद गाय के खुर के पास की मिट्टी ले लें और उसे कांच की शीशी में अपने पास सुरक्षित रख लें। ऐसा करने से आर्थिक समृद्धि मिलेगी।

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को अन्नकूट दिवस कह्ते हैं। धर्मसिन्धु आदि शास्त्रों के अनुसार गोवर्धन-पूजा के दिन गायों को सजाकर, उनकी पूजा करके उन्हें भोज्य पदार्थ आदि अर्पित करने का विधान है। इस दिन गौओ को सजाकर उनकी पूजा करके यह मंत्र करना चाहिये, गौ-पूजन का मंत्र –
लक

लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता ।

घृतं वहति यज्ञार्थ मम पापं त्यपोहतु॥

🐄 (धेनु रूप में स्थित जो लोकपालों की साक्षात लक्ष्मी है तथा जो यज्ञ के लिए घी देती है, वह गौ माता मेरे पापों का नाश करे। रात्रि को गरीबों को यथा सम्भव अन्न दान करना चाहिये।)

कैसे करें नूतन वर्ष का स्वागत – पुण्यमय दर्शन व बलि प्रतिपदा

बलि प्रतिपदा (वर्ष के प्रथम दिन)
🌿 पहले के जमाने में गाँवों में दीपावली के दिनों में वर्ष के प्रथम दिन नीम और अशोक वृक्ष के पत्तों के तोरण (बंदनवार) बाँधते थे, जिससे कि वहाँ से लोग गुजरें तो वर्ष भर प्रसन्न रहें, निरोग रहें । अशोक और नीम के पत्तों में रोगप्रतिकारक शक्ति होती है । उस तोरण के नीचे से गुजरकर जाने से वर्ष भर रोगप्रतिकारक शक्ति बनी रहती है । वर्ष के प्रथम दिन आप भी अपने घरों में तोरण बाँधो तो अच्छा है ।
🌷 नूतन वर्ष पर पुण्यमय दर्शन
दीपावली का दिन वर्ष का आखिरी दिन है और बाद का दिन वर्ष का प्रथम दिन है, विक्रम सम्वत् के आरम्भ का दिन है (गुजराती पंचांग अनुसार)। उस दिन जो प्रसन्न रहता है, वर्ष भर उसका प्रसन्नता से जाता है।
‘महा

भारत भगवान व्यास जी कहते हैं-

यो यादृशेन भावेन तिष्ठत्यस्यां युधिष्ठिर।

हर्षदैन्यादिरूपेण तस्य वर्षं प्रयाति वै।।

🙏🏻 ‘हे युधिष्ठिर ! आज नूतन वर्ष के प्रथम दिन जो मनुष्य हर्ष में रहता है, उसका पूरा वर्ष हर्ष में जाता है और जो शोक में रहता है, उसका पूरा वर्ष शोक में व्यतीत होता है।’
दीपावली के दिन, नूतन वर्ष के दिन मंगलमय चीजों का दर्शन करना भी शुभ माना गया है, पुण्य-प्रदायक माना गया है। जैसेः
➡ उत्तम ब्राह्मण, तीर्थ, वैष्णव, देव-प्रतिमा, सूर्यदेव, सती स्त्री, संन्यासी, यति, ब्रह्मचारी, गौ, अग्नि, गुरु, गजराज, सिंह, श्वेत अश्व, शुक, कोकिल, खंजरीट (खंजन), हंस, मोर, नीलकंठ, शंख पक्षी, बछड़े सहित गाय, पीपल वृक्ष, पति-पुत्रावली नारी, तीर्थयात्री, दीपक, सुवर्ण, मणि, मोती, हीरा, माणिक्य, तुलसी, श्वेत पुष्प, फ़ल, श्वेत धान्य, घी, दही, शहद, भरा हुआ घड़ा, लावा, दर्पण, जल, श्वेत पुष्पों की माला, गोरोचन, कपूर, चाँदी, तालाब, फूलों से भरी हुई वाटिका, शुक्ल पक्ष का चन्द्रमा, चंदन, कस्तूरी, कुम कुम, पताका, अक्षयवट (प्रयाग तथा गया स्थित वटवृक्ष) देववृक्ष (गूगल), देवालय, देवसंबंधी जलाशय, देवता के आश्रित भक्त, देववट, सुगंधित वायु शंख, दुंदुभि, सीपी, मूँगा, स्फटिक मणि, कुश की जड़, गंगाजी मिट्टी, कुश, ताँबा, पुराण की पुस्तक, शुद्ध और बीजमंत्रसहित भगवान विष्णु का यंत्र, चिकनी दूब, रत्न, तपस्वी, सिद्ध मंत्र, समुद्र, कृष्णसार (काला) मृग, यज्ञ, महान उत्सव, गोमूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोधूलि, गौशाला, गोखुर, पकी हुई फसल से भरा खेत, सुंदर (सदाचारी) पद्मिनी, सुंदर वेष, वस्त्र एवं दिव्य आभूषणों से विभूषित सौभाग्यवती स्त्री, क्षेमकरी, गंध, दूर्वा, चावल औऱ अक्षत (अखंड चावल), सिद्धान्न (पकाया हुआ अन्न) और उत्तम अन्न – इन सबके दर्शन से पुण्य लाभ होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्म खंड, अध्यायः 76 एवं 78)*
कै

कैसे करें नूतन वर्ष का स्वागत

नूतन वर्ष के दिन सुबह जगते ही बिस्तर पर बैठे-बैठे चिंतन करना कि ‘आनंदस्वरूप परमात्मा मेरा आत्मा है । प्रभु मेरे सुहृद हैं, सखा हैं, परम हितैषी हैं, ॐ ॐ आनंद ॐ… ॐ ॐ माधुर्य ॐ…। वर्ष शुरू हुआ और देखते-देखते आयुष्य का एक साल बीत जायेगा फिर दीपावली आयेगी । आयुष्य क्षीण हो रहा है । आयुष्य क्षीण हो जाय उसके पहले मेरा अज्ञान क्षीण हो जाय । हे ज्ञानदाता प्रभु ! मेरा दुःख नष्ट हो जाय, मेरी चिंताएँ चूर हो जायें । हे चैतन्यस्वरूप प्रभु ! संसार की आसक्ति से दुःख, चिंता और अज्ञान बढ़ता है और तेरी प्रीति से सुख, शांति और माधुर्य का निखार होता है। प्रभु ! तुम कैसे हो तुम्हीं जानो, हम जैसे-तैसे हैं तुम्हारे हैं देव।


🙏🏻 फिर बिस्तर पर तनिक शांत बैठे रहकर अपनी दोनों हथेलियों को देखना –

काग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविंदः प्रभाते करदर्शनम्।।

अपने मुँह पर हाथ घुमा लेना। फिर दायाँ नथुना चलता हो तो दायाँ पैर और बायाँ चलता हो तो बायाँ पैर धरती पर पहले रखना।

दिन विचारना कि “जिन विचारों और कर्मों को करने से हम मनुष्यता की महानता से नीचे आते हैं उनमें कितना समय बरबाद हुआ ? अब नहीं करेंगे अथवा कम समय देंगे और जिनसे मनुष्य-जीवन का फायदा होता है – सत्संग है, भगवन्नाम सुमिरन है, सुख और दुःख में समता है, साक्षीभाव है… इनमें हम ज्यादा समय देंगे, आत्मज्योति में जियेंगे । रोज सुबह नींद में से उठकर 5 मिनट शिवनेत्र पर ॐकार या ज्योति अथवा भगवान की भावना करेंगे…।

कैसा रहेगा यह वर्ष

लेखन संबंधी मामलों के लिए उत्तम होती है। जो विद्यार्थी सीए की परीक्षा देंगे उनके लिए शुभ रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में भी सफलता रहेगी। विवाह के योग भी बनेंगे। स्त्री पक्ष का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति अपने परिश्रम के बल पर उन्नति के हकदार होंगे। बैक परीक्षाओं में भी सफलता अर्जित करेंगे। दाम्पत्य जीवन में मिली जुली स्थिति रहेगी। आर्थिक मामलों में सभंलकर चलना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

इसे भी पढ़े

आपका मुद्दा

उठाइए अपना मुद्दा, ओबेन न्यूज़ बनेगा आपकी आवाज। शिक्षा, सड़क, बिजली, नौकरी, काम से सम्बन्धित किसी भी मुद्दे का वीडियो बना कर 9111124210 पर भेजें।