महिला के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर दो फीसद की छूट, महिलाओं के लिए और भी कई घोषणाएं

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मकान, प्लाट, खेती की जमीन अगर पत्नी, बहन, बेटी के नाम से खरीद रहे हैं तो अब फिर रजिस्ट्री कराने पर दो फीसद की छूट दी जाएगी। यह छूट रजिस्ट्री के लिए लगने वाली पांच फीसद स्टांप शुल्क में दी जाएगी। इससे शहरी क्षेत्र में होने वाली रजिस्ट्री 12.5 फीसद की जगह 10.5 फीसद पर होगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में कोई काम ऐसा नहीं जो मां, बहन और बेटी नहीं कर सकती। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत का संकल्प करने के लिए आत्मनिर्भर मप्र बनाना है, जिसमें बहनों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज भी एक हजार बेटे पैदा होते हैं तो बेटियां 918 पैदा होती हैं। ये भेदभाव इंसान करता है। जब तक बेटी बोझ समझी जाती रहेगी, तब तक उन्हें धरती पर आने से रोका जाएगा। इसलिए हमने तय किया कि लाडली लक्ष्मी योजना बनाएंगे, ताकि बेटी वरदान बन सके।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित स्व-सहायता समूह के सदस्यों को 200 करोड़ के बैंक ऋण वितरण कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए कई घोषणाएं की। यह योजना विगत दस साल से बंद थी, अब इसे फिर से शुरू किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन कर वर्चुअल रूप से किया गया।

उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में आधी सीटों पर महिला आरक्षण हुआ। ऐसा करने वाला मप्र पहला राज्य था। मैं गर्व से कहता हूं कि मप्र की बहनों और बेटियों ने पुरुषों से अच्छी सरकार चलाकर दिखा दी। हमने तय किया कि 33 फीसद सरकारी नौकरियां केवल बेटियों को दी जाएंगी। चाहे जो हो जाए पुलिस में 30 फीसद भर्तियां बेटियों की होगी। मेरी बेटियों ने मेरे भरोसे को तोड़ा नहीं, उसे और पुष्ट किया। कोरोना काल में भी मेरी बहनें आगे आईं। पूरे प्रदेश की बहनों ने चमत्कार कर दिखाया। स्व-सहायता समूह की बहनें एक अलग ताकत के साथ खड़ी हो रही हैं। अब लोकल को वोकल स्व-सहायता समूह की बहनों के जरिए बनाऊंगा।

यह भी हुई घोषणाएं

– बेटियों को बरगलाने वालों को मिलेगा आजीवन कारावास। इसके लिए विधानसभा में धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक लाया गया है।

– संविदाकर्मी महिलाओं को 180 दिन का प्रसूति अवकाश दिया जाएगा।

– स्व-सहायता समूहों को दो फीसद पर दिया जाएगा लोन। तीन लाख 22 हजार स्व-सहायता समूह का गठन हो गया है। हर माह 150 करोड़ महिला स्व-सहायता समूह के खाते में डाले जाते रहेंगे।

– छोटे-छोटे मामले थाने में क्यों जाएं, इसलिए पंचायतों में नारी अदालत बनाएंगे और छोटे-मोटे मामले सुलझाने की कोशिश करेंगे।

– योजनाओं में जितने मकान बनेंगे, उनमें बहन का भी नाम होगा और बहन को ही चाबी दी जाएगी। कोई बहन और बेटी ठेकेदारी का काम कराने के लिए रजिस्ट्रेशन कराएगी तो पैसा नहीं लिया जाएगा।

– गेहूं व अन्य फसलों की खरीदी महिलाओं के स्व-सहायता समूह करेंगे। कम से कम 10 फीसद खरीदी बहनें करें, ताकि उनके खाते में पैसा आए।

– बेटा-बेटी की संख्या तीन साल तक बराबर होने पर गांव के विकास के लिए मिलेंगे दो लाख। पंचायत को किया जाएगा पुरस्कृत।

– 23 हजार बेटियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रहे हैं, ताकि बेटियों को कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े।


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