जीएसटी की तारीखों में राहत मांग रहे थे व्यापारी, घोषणा हुई आयकर में

इंदौर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर आयकर एक्ट के तहत तारीखों में राहत की घोषणा की। आयकर के कुछ पालन प्रतिवेदनों के मामलें में तारीख बढ़ाकर 31 मई तक कर दी गई है।

हालांकि वित्त मंत्रालय द्वारा की गई इस राहत की घोषणा से न तो करदाताओं को सीधा लाभ मिलता दिख रहा है न ही सीए और कर सलाहकार संतुष्ट है। दरअसल व्यापारियों से लेकर करदाता तक महामारी के मौजूदा दौर में जीएसटी की तारीखों में राहत की मांग कर रहे हैं और सरकार ने सिर्फ आयकर के उन बिंदुओं पर राहत दी जिससे आम करदाता के हिस्से में खास लाभ नहीं आना है।


आदेश में आयकर के कर निर्धारण के मामले में कमिश्नर के सामने प्रस्तुत की जाने वाली अपील जिसकी अंतिम तिथि पहले 1 अप्रैल थी उसे अब 31 मई तक बढ़ा दिया गया है। डिस्प्युट रिजोल्युशन पैनल (डीआरपी) के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली आपत्ति के लिए 1 अप्रैल को बीत चुकी तारीख को भी अब 31 मई तक बढ़ाया गया है।

आयकर अधिनियम के सेक्शन 148 के तहत जारी नोटिस के जवाब में जमा किए जाने वाले आयकर रिटर्न जिसकी तारीख भी 1 अप्रैल को बीत चुकी थी उसे 31 मई तक बढ़ाया गया है।

इसके अलावा असेसमेंट वर्ष 2020-21 या वित्त वर्ष 2019-20 के रिवाइज या देरी से जमा होने आयकर रिटर्न जिनकी तारीख 31 मार्च को समाप्त हो चुकी है।

उनके लिए भी अब मियाद बढ़ाने की घोषणा हुई है। एक महीने बाद नोटिफिकेशन जारी कर अब 31 मई तक ऐसे रिटर्न दाखिल करने का समय दिया गया है। सरका के नोटिफिकेशन के अनुसार कोरोना महामारी की स्थिति को देखते हुए ये अतिरिक्त मोहलत दी गई है।। हालांकि तमाम चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर सलाहकारों के अनुसार सरकार की ओर से घोषित इन राहत का कोई मतलब नहीं है। बीते सप्ताहों से देशभर के व्यापारी व करसलाहकार जीएसटी की तारीखों में वृद्धि की मांग कर रहे हैं।

महामारी इस समय भीषण दौर में है। जीएसटी के रिटर्न और पालन की खानापूर्ति से हर व्यापारी व व्यवसायी प्रभावित होता है। ऐसे में अपेक्षा और उम्मीद जीएसटी की तारीखों में वृद्धि की थी।

इसके उलट दिल्ली से आदेश जारी हुआ तो आयकर की उन तारीखों में वृद्धि का जिसकी कार्रवाई 31 मार्च को पूरी हो चुकी है।


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